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Showing posts from November, 2024
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  क्या है  "वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन" योजना: उच्च शिक्षा और शोध में एक नया आयाम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने "वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन" योजना को मंजूरी दी है।  यह नई केंद्रीय क्षेत्रीय योजना देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों और शोध एवं विकास (R&D) प्रयोगशालाओं के लिए शोध लेखों और जर्नल्स तक पहुंच प्रदान करेगी। योजना की मुख्य विशेषताएँ: डिजिटल प्रक्रिया: यह पूरी तरह डिजिटल और सरल प्रक्रिया द्वारा संचालित होगी। बजट आवंटन: तीन वर्षों (2025, 2026 और 2027) के लिए 6,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। लाभार्थी संस्थान: योजना का लाभ 6,300+ उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) और केंद्रीय सरकार के R&D संस्थानों को मिलेगा। करीब 1.8 करोड़ छात्र , फैकल्टी और शोधकर्ता इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। क्रियान्वयन एजेंसी: योजना का समन्वय इंफॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी नेटवर्क (INFLIBNET) , जो UGC का एक स्वायत्त केंद्र है, द्वारा किया जाएगा। अनुसंधान को बढ़ावा: योजना "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020" और "विकसि...
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  मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर का आज का कार्यक्रम मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर आज, 25 नवंबर 2024, ग्वालियर से नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे। दोपहर 12:35 बजे : ग्वालियर एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान। दोपहर 2:30 बजे : नई दिल्ली में माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी के निवास पर उनकी पुत्री के वैवाहिक कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। सायं 4:55 बजे : हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से राजधानी एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 22222) के माध्यम से ग्वालियर के लिए प्रस्थान। यह कार्यक्रम श्री नरेंद्र सिंह तोमर की व्यस्त दिनचर्या और सामाजिक दायित्वों को दर्शाता है।
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  " दिल की सुने या दिमाग की" : आइये इसके अंतर को समझें  हम सभी ने जीवन में ऐसे क्षण अनुभव किए हैं, जब हमें कठिन निर्णय लेना पड़ता है। ऐसे समय में एक सवाल बार-बार हमारे मन में आता है: "दिल की सुनें या दिमाग की?"   यह सवाल हमारी भावनाओं और तर्क के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को दर्शाता है। यह न केवल व्यक्तिगत बल्कि पेशेवर जीवन में भी हमारी सोच को प्रभावित करता है।  आइए इस सवाल पर गहराई से विचार करें। दिल और दिमाग: दो अलग-अलग सलाहकार हैं 1. दिल क्या कहता है? दिल हमारी भावनाओं, इच्छाओं और संवेदनाओं का केंद्र है। यह हमें वह करने के लिए प्रेरित करता है जो हमें खुशी, संतोष, या जुनून प्रदान करता है। दिल की आवाज से निर्णय लेना अक्सर हमें अपनी आत्मा के करीब ले जाता है। जब आप अपनी पसंद का करियर चुनते हैं, लेकिन उसमें चुनौतियां अधिक होती हैं, तब आपका दिल कहता है, "यह मेरा सपना है। मुझे इसे पूरा करना चाहिए।" किसी रिश्ते को संभालने की कोशिश में भी दिल की आवाज प्रबल होती है, क्योंकि वह भावनात्मक पहलुओं पर अधिक ध्यान देता है। 2. दिमाग क्या कहता है? दिमाग तर्क,...
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  परिवार के फॅमिली-डॉक्टर का महत्व: आपकी सेहत का सच्चा साथी आज के तेज़-तर्रार युग में, जहां स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी और सुझाव इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हैं, एक विश्वसनीय पारिवारिक डॉक्टर की भूमिका को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।  लेकिन, यह रिश्ता आज भी व्यक्तिगत और प्रभावी स्वास्थ्य देखभाल का मूल आधार है।  परिवार का डॉक्टर होना केवल सहूलियत की बात नहीं है—यह एक स्वस्थ और संतुलित जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है।  आइए जानें कि परिवार के डॉक्टर का होना क्यों इतना महत्वपूर्ण है। परिवार का फॅमिली-डॉक्टर कौन होता है ? परिवार का डॉक्टर वह स्वास्थ्य विशेषज्ञ होता है, जो हर उम्र और लिंग के व्यक्ति की व्यापक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करता है।  यह डॉक्टर आपकी अधिकतर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए पहला संपर्क बिंदु होता है और नियमित जांच से लेकर पुरानी बीमारियों के प्रबंधन तक हर स्थिति में मदद करता है। परिवार का फॅमिली-डॉक्टर क्यों जरूरी है ? 1. व्यक्तिगत देखभाल आपका परिवार का डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, जीवनशैली, और जेनेटिक जानकारी से वाकिफ होता है। यह जानकारी उन्...
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  राहुल गांधी की राजनीतिक विफलता: जनता से जुड़ने में असमर्थता का दंश भारतीय राजनीति में राहुल गांधी का नाम एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में लिया जाता है। वे एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसने दशकों तक देश की राजनीति पर प्रभाव डाला है। हालांकि, व्यक्तिगत करिश्मा और राजनीतिक नेतृत्व में उनकी कमी ने उन्हें जनता के बीच वह स्थान दिलाने में विफल कर दिया, जो एक सफल नेता के लिए आवश्यक है। उनकी असफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण है संवेदनशील मुद्दों पर जन-आंदोलन खड़ा न कर पाना। संवेदनशील मुद्दों पर असफलता भारतीय राजनीति में संवेदनशील मुद्दे जनता की भावनाओं और आवश्यकताओं से गहराई से जुड़े होते हैं। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महिला सुरक्षा, और शिक्षा जैसे मुद्दे लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव डालते हैं। ऐसे मुद्दों पर एक नेता का जनता के साथ खड़ा होना और उनकी आवाज़ बनना बेहद महत्वपूर्ण होता है। राहुल गांधी ने कई बार इन मुद्दों को उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह उन्हें एक बड़े जन-आंदोलन में परिवर्तित करने में विफल रहे। उनकी रणनीति में जोश और जनता से जुड़ाव की कमी स्पष्ट दिखती है। जब कि...
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 आचार्य संदीपनी द्वारा बाल-शिक्षा के विविध विषय   भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं में आचार्य संदीपनी को एक आदर्श गुरु के रूप में मान्यता प्राप्त है। उनका आश्रम, जो उज्जैन में स्थित है, न केवल शिक्षा का केंद्र था, बल्कि जीवन के हर पहलू को आत्मसात करने का स्थान भी था। यहां भगवान श्रीकृष्ण, उनके भाई बलराम और सुदामा ने शिक्षा ग्रहण की थी।   आचार्य संदीपनी ने बाल-शिक्षा को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि व्यावहारिक और नैतिक जीवन के लिए भी आवश्यक गुणों पर जोर दिया। उनके द्वारा सिखाए गए विविध विषय आज भी शिक्षा और ज्ञान की प्रासंगिकता को दर्शाते हैं।   1. वेद और शास्त्र अध्ययन   आचार्य संदीपनी का आश्रम वैदिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। विद्यार्थियों को वेदों, उपनिषदों और धर्मशास्त्रों का गहन अध्ययन कराया जाता था। यह अध्ययन न केवल धार्मिक परंपराओं को समझने में सहायक था, बल्कि जीवन के मूलभूत सिद्धांतों को आत्मसात करने में भी मदद करता था।   2. शस्त्र और शास्त्र का संतुलन  संदीपनी आश्रम में शिक्षा का उद्देश्य शस्त्र और शास्त्...
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 सर्दियों में वर्जिश के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें: स्वस्थ और सुरक्षित फिटनेस का राज  सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा और कम तापमान के कारण शरीर को सक्रिय रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  हालांकि, यह समय फिटनेस पर ध्यान देने और नियमित वर्जिश करने का सबसे अच्छा अवसर है।  ठंड में वर्जिश न केवल शरीर को गर्म रखने में मदद करती है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है।  लेकिन इस मौसम में वर्जिश के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि आप स्वस्थ और सुरक्षित रहें।   1. सही कपड़े पहनें  ठंड के मौसम में वर्जिश करते समय शरीर को गर्म रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए लेयरिंग का तरीका अपनाएं:   - एक बेस लेयर जो पसीना सोखने वाली हो।   - दूसरी परत शरीर को गर्म रखने के लिए।   - बाहरी परत जो हवा और ठंड से बचाए।   इसके अलावा, हाथों और पैरों को गर्म रखने के लिए दस्ताने और मोजे पहनना न भूलें।  सिर पर टोपी या हेडबैंड लगाकर गर्मी बनाए रखें।   2. वॉर्म-अप को प्राथमिकता दें   सर्दियों में मांसपेशियां ठ...
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  रविवार को अदालतों का संचालन: केस पेंडेंसी और न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम भारत में अदालतों में लम्बे समय से चली आ रही केसों की पेंडेंसी समस्या गंभीर होती जा रही है।  न्यायिक प्रक्रिया में देरी आम नागरिकों के न्याय के अधिकार को प्रभावित कर रही है, जिससे जरूरत है कि न्यायिक व्यवस्था में नए सुधार लाए जाएं।  केसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, अदालतों में रविवार को भी एक तिहाई क्षमता के साथ काम करने का विचार बहुत ही सार्थक हो सकता है, जैसा कि चिकित्सा सेवाओं में होता है, जिससे न्याय तक पहुँच को सुनिश्चित किया जा सके।  भारत में केस पेंडेंसी के आंकड़े भारत के न्यायिक तंत्र में वर्तमान में लगभग 4.6 करोड़ मामले लंबित हैं, जिनमें से 70% मामले जिला अदालतों में लंबित हैं।  देश की उच्च न्यायालयों में लगभग 59 लाख मामले और सुप्रीम कोर्ट में लगभग 70,000 मामले लंबित हैं।  केवल कोविड-19 महामारी के दौरान ही केसों में लगभग 30% की वृद्धि हुई।  वर्ष 2022 तक आंकड़े     - सुप्रीम कोर्ट: 70,000 से अधिक लंबित मामले   - उच्च न्याय...